सज्जन कुमार के लिए इतनी हमदर्दी, 1984 के पीड़ितों पर चुप्पी, ये दोहरा रवैया क्यों : पन्नू

कांग्रेस ने आरोपी सज्जन कुमार को अपना ‘आदर्श‘ बताया, अब भाजपा सांसद उनकी श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए : बलतेज पन्नू

भाजपा सांसद कभी भी 1984 के बाद से बेघर हुए सिख परिवारों से मिले, लेकिन दोषी सज्जन कुमार की श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए : बलतेज पन्नू

किसी ने भी 1984 से प्रभावित सिख परिवारों का दुख सांझा नहीं किया, लेकिन सज्जन कुमार की मौत पर संवेदना जताई जा रही है : बलतेज पन्नू

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़, 28 अगस्त। आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने शुक्रवार को कांग्रेस और सांसद पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अपने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, दोनों पार्टियों ने अल्पसंख्यकों, खासकर सिख समुदाय के प्रति एक जैसा रवैया दिखाया है, और वे 1984 के सिख नरसंहार के पीड़ितों का दर्द समझने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। 

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एक वीडियो संदेश में आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा, “1984 के सिख नरसंहार केस में कोर्ट से दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार की मौत के बाद कांग्रेस नेताओं का रिएक्शन सबने देखा। कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने तो सज्जन कुमार को अपना ‘आदर्श‘  तक कह दिया था, हालांकि बाद में वे अपने बयान से मुकर गए थे।”

उन्होंने कहा कि उस समय भाजपा ने इस बयान के लिए दीपेंद्र हुड्डा और कांग्रेस की कड़ी आलोचना की थी। हालांकि, पन्नू ने कहा कि अब भाजपा के अपने व्यवहार ने उसके दोहरे रवैये को सामने ला दिया है। “अब भाजपा का असली चेहरा भी सामने आ गया है। सज्जन कुमार की ‘श्रद्धांजलि सभा‘ ​​में भाजपा के तीन सांसद मौजूद थे। इनमें वेस्ट दिल्ली से सांसद कमलजीत सहरावत, साउथ दिल्ली से सांसद रामबीर सिंह बिधूड़ी और नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली से सांसद योगेंद्र चंदोलिया शामिल थे।” 

बलतेज पन्नू ने भाजपा  नेताओं की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे 1984 के नरसंहार के दौरान बेघर हुए सिख परिवारों के साथ कभी खड़े नहीं हुए। “ये वही लोग हैं जो 1984 में बेघर हुए सिख समुदाय के लोगों के पास कभी नहीं गए और न ही उनके परिवारों से मिलकर उनका दर्द बांटा। लेकिन,  अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार की मौत से वे बहुत दुखी हैं। 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा दोनों का यह व्यवहार दिखाता है कि किसी भी पार्टी ने सिख समुदाय और उन परिवारों के दर्द को सही मायने में नहीं समझा है जो आज भी 1984 के दर्द से जूझ रहे हैं। बलतेज पन्नू ने कहा, “चाहे कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी, दोनों पार्टियों का माइनॉरिटी के प्रति रवैया एक जैसा रहा है।”

 

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