जय राम ठाकुर ने पंजाब के नंगल, श्री आनंदपुर साहिब और गढ़शंकर में नशा विरोधी यात्राओं में हिस्सा लिया
उन्होंने नशे के खिलाफ लड़ाई को जनआंदोलन बनाने की अपील की
न्यूज़म ब्यूरो
श्री आनंदपुर साहिब, 24 सितंबर | पंजाब दौरे पर पहुंचे जय राम ठाकुर ने नशा विरोधी यात्राओं में जनसभाओं को संबोधित किया।
उन्होंने नशे के खिलाफ सरकार और समाज की संयुक्त भूमिका पर जोर दिया।
जय राम ठाकुर ने हिमाचल समेत पड़ोसी राज्यों के समन्वय से नशे के नेटवर्क पर कार्रवाई का अनुभव साझा किया। उन्होंने रोजगार को युवाओं को नशे से दूर रखने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

Nasha Mukt Bharat अभियान को जनभागीदारी से मजबूत करने की अपील
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित नशा विरोधी यात्राओं में हिस्सा लिया। उन्होंने नंगल, श्री आनंदपुर साहिब और गढ़शंकर में जनसभाओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने नशे के खिलाफ व्यापक सामाजिक भागीदारी की जरूरत बताई।
श्री आनंदपुर साहिब पहुंचने पर जय राम ठाकुर ने पवित्र गुरुद्वारे में माथा टेका। उन्होंने अरदास कर देशवासियों के मंगल की कामना की। इसके बाद उन्होंने नशा विरोधी यात्रा में हिस्सा लिया और लोगों को नशे के खिलाफ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से निपटना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, समाज और युवाओं की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। उनके अनुसार, सामूहिक प्रयासों से ही इस चुनौती का प्रभावी तरीके से सामना किया जा सकता है।
Drug-Free India को लेकर जय राम ठाकुर का संदेश

जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नशा मुक्त भारत का संकल्प लिया है। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र सरकार की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए नशे के खिलाफ भी प्रभावी अभियान की बात कही।
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल राजनीतिक या प्रशासनिक अभियान तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसे समाज के स्तर पर भी आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
जय राम ठाकुर ने पंजाब में आयोजित यात्राओं के दौरान लोगों की भागीदारी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए परिवारों और सामाजिक संगठनों को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
Punjab Drug Control में रोजगार और समन्वय पर जोर
पूर्व मुख्यमंत्री ने पंजाब में नशे की समस्या के समाधान के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर उपलब्ध होने से उन्हें सकारात्मक दिशा देने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने पंजाब सरकार पर रोजगार के मुद्दे पर सवाल भी उठाए। साथ ही केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई।
जय राम ठाकुर ने कहा कि नशे का नेटवर्क कई राज्यों से जुड़ा हो सकता है। इसलिए केवल एक राज्य की कार्रवाई से समस्या का पूरी तरह समाधान करना कठिन है।
Inter-State Coordination का हिमाचल मॉडल बताया

जय राम ठाकुर ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश की जेलों में नशे से जुड़े मामलों में दूसरे राज्यों के आरोपी भी सामने आए थे।
इसके बाद हिमाचल प्रदेश ने पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली के साथ मिलकर कार्रवाई के लिए संयुक्त टीमें गठित की थीं। उनके अनुसार, इस तरह के समन्वित प्रयासों से नशे के नेटवर्क पर कार्रवाई को मजबूती मिली।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, तस्करों पर कार्रवाई और युवाओं के लिए रोजगार जरूरी हैं। साथ ही समाज की सक्रिय भागीदारी भी इस अभियान को प्रभावी बना सकती है।
16th Finance Commission से हिमाचल की पंचायतों को ₹3,744 करोड़
जय राम ठाकुर ने 16वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं के लिए ₹3,744 करोड़ की धनराशि स्वीकृत होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार और पंचायती राज मंत्रालय का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में 3,650 से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। ऐसे में इस राशि से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को वित्तीय सहायता मिलेगी।
जय राम ठाकुर के अनुसार, 15वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल के ग्रामीण स्थानीय निकायों को ₹2,102 करोड़ मिले थे। 16वें वित्त आयोग में यह राशि बढ़कर ₹3,744 करोड़ हो गई है। उन्होंने इसे पिछली राशि से लगभग 78.1 प्रतिशत अधिक बताया।
Panchayat Development के लिए पारदर्शी इस्तेमाल की अपील
जय राम ठाकुर ने प्रदेश सरकार से केंद्र से मिली राशि का पारदर्शी और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि धनराशि का सही इस्तेमाल होने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिल सकती है।
उन्होंने पंचायतों को मजबूत करने और गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया। उनके मुताबिक, स्थानीय निकायों को पर्याप्त संसाधन मिलने से ग्रामीण विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता है।
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