मानवाधिकार कार्यकर्ता Jaswant Singh Khalra की याद में रविवार को अमृतसर में विशेष समागम आयोजित किया गया
यह कार्यक्रम श्री अकाल तख्त साहिब की सरपरस्ती में एसजीपीसी ने कराया
न्यूज़म ब्यूरो
अमृतसर, 6 सितंबर। Jaswant Singh Khalra की याद में अमृतसर के श्री हरिमंदिर साहिब परिसर स्थित गुरुद्वारा शहीद बाबा गुरबख्श सिंह जी में समागम आयोजित किया गया। श्री अकाल तख्त साहिब की सरपरस्ती में हुए इस कार्यक्रम में खालड़ा के मानवाधिकार संघर्ष को याद किया गया। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि 1982 से 1994 के दौरान मारे गए लोगों का विवरण जुटाने का काम जल्द शुरू होगा। हरिके में जसवंत सिंह खालड़ा की शहीदी यादगार बनाने की भी तैयारी है।
कार्यक्रम में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज सहित कई प्रमुख लोग पहुंचे।
तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह भी मौजूद रहे।
एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी और अन्य धार्मिक हस्तियां भी शामिल हुईं।
श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद गुरबाणी कीर्तन हुआ।
इसके बाद अरदास की गई और संगत को हुकमनामा सुनाया गया।

Jaswant Singh Khalra की भूमिका को किया याद
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने खालड़ा के योगदान को याद किया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1982 से 1994 के दौरान पंजाब में बड़ी संख्या में लोग मारे गए।
उनके अनुसार कई शवों को लावारिस बताकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
कई शवों को नदियों में बहा दिए जाने की बात भी सामने आई।
उन्होंने कहा कि Jaswant Singh Khalra ने इन मामलों की जानकारी जुटाने का काम किया।
उन्होंने लावारिस बताए गए शवों के बारे में रिकॉर्ड एकत्र करने में मेहनत की।
इसी संघर्ष के दौरान खालड़ा का भी अपहरण कर हत्या कर दी गई।
जत्थेदार ने कहा कि खालड़ा ने मानवाधिकार और इंसाफ के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
उन्होंने गुरु तेग बहादुर साहिब के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाया।
SGPC हरिके में बनाएगी यादगार
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने हरिके में यादगार बनाने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि इसके लिए काम जल्द शुरू किया जाएगा।
एसजीपीसी वर्ष 1982 से 1994 के दौरान मारे गए लोगों का विवरण भी जुटाएगी।
उन्होंने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया की सरपरस्ती श्री अकाल तख्त साहिब करेगा।
एसजीपीसी की ओर से इसके लिए आवश्यक कार्यवाही शुरू की जाएगी।
श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश पर पहले ही एक सब-कमेटी गठित की जा चुकी है।
यह कमेटी हरिके में उपयुक्त जगह तलाश रही है।
जगह तय होने के बाद यादगार के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।
Jaswant Singh Khalra के संघर्ष को बताया मिसाल
एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भी खालड़ा को याद किया।
उन्होंने कहा कि वह मानवाधिकार और इंसाफ के लिए संघर्ष करने वाली प्रमुख शख्सियत थे।
उन्होंने अपना जीवन दूसरों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि खालड़ा ने यातनाओं के बाद मारे गए युवाओं के लिए आवाज उठाई।
उनके परिवार को भी सरकारी दमन का सामना करना पड़ा।
इसके बावजूद उनके स्वजनों ने खालड़ा की शुरू की लड़ाई को आगे बढ़ाया।
समागम में परिजनों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान Jaswant Singh Khalra की बहन बीबी बलबीर कौर को सिरोपा देकर सम्मानित किया गया।
कुलदीप सिंह बचड़े की पत्नी बीबी कवलजीत कौर को भी सम्मान दिया गया।
समागम में एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नण सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
अंतिरंग सदस्य मंगविंदर सिंह खापड़खेड़ी और सदस्य भाई राजिंदर सिंह मेहता भी पहुंचे।
एडवोकेट भगवंत सिंह स्यालका समेत अन्य पदाधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
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