न्याय व आत्मसम्मान के लिए सब कुर्बान करने को तैयार, केजरीवाल ने कायम की मिसाल : मान

आप के नेशनल कन्वीनर केजरीवाल का फैसला सच्चाई, आत्म-सम्मान व गांधीवादी सत्याग्रह पर आधारित, पंजाब लीडरशिप चट्टान की तरह उनके साथ

जब न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो जनता का भरोसा डगमगाता है, हम सभी अरविंद केजरीवाल के साथ मजबूती से खड़े हैं : मान 

जब न्याय पर राजनीतिक साया पड़ता है, तो सच्चाई और निष्पक्षता दोनों खत्म हो जाती हैं, भाजपा से जुड़े मामलों में शक होना स्वाभाविक है : अमन अरोड़ा 

आजादी के बाद पहली बार किसी नेता ने सिस्टम की चिंताओं को उजागर करने को ऐसा रास्ता चुना, केजरीवाल का कदम ऐतिहासिक है : चीमा 

न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए। हां, अरविंद केजरीवाल का स्टैंड अंतरात्मा की आवाज है : बैंस

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न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़, 27 अप्रैल। आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब की सीनियर लीडरशिप ने पार्टी के नेशनल कन्वीनर अरविंद केजरीवाल के जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की कोर्ट में पेश न होने के फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। पार्टी ने इसे सच्चाई, आत्म-सम्मान और गांधीवादी सत्याग्रह की फिलॉसफी में एक सैद्धांतिक कदम बताया है। 

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘X’ पर लिखा, “अरविंद केजरीवाल ने साबित कर दिया है कि न्याय और आत्म-सम्मान के लिए इंसान को सब कुछ कुर्बान करने के लिए तैयार रहना चाहिए। जब ​​न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो जनता का भरोसा डगमगा जाता है। हम सब चट्टान की तरह उनके साथ खड़े हैं।” 

इस बीच, आप पंजाब के प्रधान अमन अरोड़ा ने कहा, “जब न्याय पर राजनीतिक साया पड़ता है, तो सच्चाई और निष्पक्षता दोनों को नुकसान होता है। भाजपा और उसके वैचारिक ताने-बाने से जुड़े मामलों में निष्पक्षता पर शक होना स्वाभाविक है।” 

अरविंद केजरीवाल के फैसले का ज़िक्र करते हुए अमन अरोड़ा ने कहा, “सत्याग्रह का रास्ता अपनाने का उनका फैसला महात्मा गांधी से प्रेरित एक शांतिपूर्ण लेकिन असरदार विरोध को दिखाता है। जनता का विश्वास वापस लाने के लिए न्यायपालिका को इन उठाई जा रही इन चिंताओं का नोटिस लेना चाहिए। 

दूसरी ओर, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “यह कदम बेमिसाल है। आज़ादी के बाद शायद यह पहली बार है जब किसी नेता ने सिस्टम से जुड़ी चिंताओं को सामने लाने के लिए ऐसा रास्ता चुना है। अरविंद केजरीवाल का फैसला एक सैद्धांतिक स्टैंड है, जिसका मकसद न्याय में भरोसा बनाए रखना और यह पक्का करना है कि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रहे।” 

बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा, “न्याय प्रणाली की क्रेडिबिलिटी न केवल निष्पक्षता पर बल्कि उस निष्पक्षता की पारदर्शिता पर भी निर्भर करती है। जब कार्रवाई की निष्पक्षता पर जनता के सवाल उठते हैं, तो ऐसा स्टैंड लेना ज़रूरी हो जाता है जो सिस्टम की गरिमा की रक्षा करे।” 

इस बीच, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए। यही लीगल सिस्टम की नींव है। जब इस बेसिक स्टैंडर्ड पर भी शक हो, तो पीछे हटना कमजोरी नहीं बल्कि अंतरात्मा की आवाज है।” हरजोत सिंह बैंस ने भी अरविंद केजरीवाल के इस स्टैंड को सलाम किया।

कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर सिंह, लाल चंद कटारूचक, हरदीप सिंह मुंडियां और हरभजन सिंह ईटीओ ने भी ऐसे ही विचार प्रकट करते हुए  केजरीवाल के साथ एकजुटता दिखाई और सच्चाई और न्याय की लड़ाई के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। 

आप पंजाब के नेताओं ने मिलकर कहा कि यह फैसला न्यायपालिका के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसके ऊंचे स्टैंडर्ड बनाए रखने की अपील है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल को अपने पूरे समर्थन का भरोसा दिलाया और कहा कि पार्टी पारदर्शिता, निष्पक्षता और कानून के राज के लिए खड़ी रहेगी।

 

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