पंजाब के पीएजी ने कराई “स्थानीय शासन को सुदृढ़ करने में ऑडिट की भूमिका” पर संगोष्ठी

पंजाब के स्पीकर कुलतार सिंह संधवा, विधायक बुध राम सहित गणमान्यों ने की शिरकत, पंजाब की प्रधान महालेखाकार सुश्री नाज़ली जे.शाईन रहीं मौजूद
 
 
 
चंडीगढ़, 27 नवंबर। कार्यालय प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) पंजाब ने ऑडिट दिवस 2025 के अवसर पर “स्थानीय शासन में ऑडिट की भूमिका” विषय पर महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्थान, चंडीगढ़, में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी का उद्देश्य सार्वजनिक प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता सुनिश्चित करने में ऑडिट की अहम भूमिका को रेखांकित करना था।
 
कार्यक्रम में श्री कुलतार सिंह संधवां, माननीय अध्यक्ष, पंजाब विधानसभा मुख्य अतिथि के रूप में तथा श्री पीपीएल बुध राम, विधायक बुधलाडा एवं पंचायती राज संस्थाओं (PRI) की समिति के अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। PRI और LB की समिति के अन्य सम्मानित सदस्य—कुलजीत सिंह रंधावा, श्री अजीत पाल सिंह कोहली, श्रीमती जीवन ज्योत कौर, श्री हरदीप सिंह डिंपी ढिल्लों, श्री सुखविंदर सिंह कोटली, श्रीमती नीना मित्तल, श्री गुरलाल घनौर, श्री लाभ सिंह उगोके और श्री अशोक पराशर भी इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का हिस्सा बने।
 
संगोष्ठी में पंजाब भर के सरपंचों, नगर निगम लुधियाना की मेयर श्रीमती इंदरजीत कौर, तथा स्थानीय सरकार विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, वित्त विभाग और लोक निधि लेखा परीक्षक के वरिष्ठ अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जबकि पंजाब की प्रधान महालेखाकार सुश्री नाज़ली जे. शाईन भी मौके पर मौजूद रहीं।
 
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “अनुपालन से सशक्तिकरण तक – स्थानीय शासन में ऑडिट की भूमिका” विषय पर पैनल चर्चा रही। चर्चा में यह रेखांकित किया गया कि ऑडिट सुशासन का आधार स्तंभ है, जो वित्तीय अनुशासन, कानूनों का अनुपालन और सार्वजनिक संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग को बढ़ावा देता है। स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को मजबूत करने में ऑडिट की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि ग्रामीण विकास और शहरी निकायों के लिए आवंटित धन नागरिक कल्याण के लिए प्रभावी रूप से उपयोग हो सके।
 
संगोष्ठी ने विधायकों, लेखा परीक्षकों और जमीनी प्रतिनिधियों के बीच संवाद का मंच प्रदान किया, जिससे पारदर्शी और जवाबदेह शासन की साझा दृष्टि को बढ़ावा मिला।
 
माननीय अध्यक्ष ने कहा कि ऑडिट केवल वित्तीय प्रक्रिया नहीं है; यह लोकतांत्रिक शासन में आश्वासन और विश्वास निर्माण का उपकरण है। पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के लिए, ऑडिट एक मार्गदर्शक उपकरण है—जो उन्हें संसाधनों का कुशल प्रबंधन, अंतराल की पहचान और सेवा वितरण के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने में मदद करता है।
 
ऑडिट केवल निगरानी नहीं है; यह सशक्तिकरण का साधन है। व्यवस्थित मूल्यांकन और रचनात्मक सिफारिशों के माध्यम से, ऑडिट स्थानीय निकायों को सूचित निर्णय लेने, वित्तीय अनुशासन में सुधार और सार्वजनिक विश्वास बढ़ाने में सक्षम बनाता है। यह शासन को सिर्फ व्यय की निगरानी से प्रदर्शन आश्वासन में बदल देता है, जिससे स्थानीय संस्थाएं विकास की सच्ची एजेंट बनती हैं।
 
प्रधान महालेखाकार सुश्री नाज़ली जे. शाईन ने मीडिया को बताया कि यह संगोष्ठी सहयोगात्मक शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो विधायी निगरानी को पेशेवर ऑडिट प्रथाओं के साथ जोड़ती है, ताकि नागरिकों को अधिकतम लाभ मिल सके। आईए एंड एडी के वरिष्ठ अधिकारी और एजी कार्यालय के सभी कर्मचारी इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से शामिल हुए।
 
 

 

 
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