पंजाब को आग के हवाले करने के मामले को दबाने के लिए डी.ए. के मामले को ‘ड्रग केस’ का नाम देकर पंजाबियों को गुमराह कर रहा अनपढ़ मुख्यमंत्री का दिल्ली वाला आका केजरीवाल, मजीठिया ने चुनौती देकर झाड़ू सरकार को घेरा
अदालत में हाथ जोड़कर माफीनामा देने वाले दिल्ली के ब्लफ-मास्टर केजरीवाल ने झूठा प्रचार करके की सुप्रीम कोर्ट के हुक्मों की तौहीन
सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरोप साबित करने के लिए सरकार को मिला था 18 मार्च 2025 तक का समय, जिसे साबित करने में केजरीवाल और शराबी मुख्यमंत्री असफल साबित हुए
अपने वकील के जरिए मजीठिया ने सारे तथ्य पेश करके किया दूध का दूध, पानी का पानी
सुप्रीम कोर्ट में साबित हो चुका है, मजीठिया का ड्रग मामले से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर किसी भी तरह कोई संबंध नहीं – डी एस सोबती
ना ड्रग मनी, ना गाड़ियों में किसी को ले जाने के बारे में, न ही कोई और सबूत कुछ भी कर सका साबित
पंजाब में झाड़ू सरकार द्वारा मचाए गए गदर को छुपाने के लिए डी.ए. के केस को ड्रग का केस बनाकर दिखाने की की जा रही कोशिश का पर्दाफाश
सरकार के पास न 736 करोड़ ड्रग मनी और न ही सत्ता और संपत्ति न किसी किस्म के लिए देने, गाड़ियां इस्तेमाल के लिए देने और और संबंध होने का कोई सबूत नहीं
झूठी झाड़ू सरकार अदालत में कुछ और और अदालत के बाहर दे रही है कुछ और जानकारी
पंजाब में लाशें खुर्द-बुर्द करके अपने काले कारनामे छुपाने वाली झाड़ू सरकार का अंत करीब
सरकार के वकील फेरी सोफत ने ही झूठी झाड़ू सरकार की साजिश को किया ब्यूरो तरह बेनकाब
सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कर दिया कि मेरे खिलाफ ड्रग तस्करी का कोई सबूत है तो सामने लाओ; वकील ने अदालती कार्रवाई का हवाला देकर सरकार के दावों पर उठाए सवाल
झाड़ू सरकार ने झूठे दोष साबित करने के लिए बनाईं चार SIT पर कुछ भी नहीं कर सकी साबित
आय से अधिक संपत्ति मामले में भी सरकार झूठे आंकड़ों के अलावा कुछ भी साबित नहीं कर सकी
घर-घर नशा पहुंचाने वाली झाड़ू पार्टी दूसरों पर झूठे आरोप लगाकर नहीं बचा सकेगी अपनी सरकार
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 28 अक्टूबर। शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने आज पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पंजाब को आग के हवाले करने के मामले को दबाने के लिए दिल्ली का ब्लफ-मास्टर अरविंद केजरीवाल डी.ए. के मामले को ‘ड्रग केस’ का नाम देकर पंजाबियों को गुमराह कर रहा है। केजरीवाल और भगवंत मान की अगुवाई वाली झाड़ू सरकार द्वारा पंजाब में मचाए गए गदर को छुपाने के लिए इस मामले को ड्रग केस के तौर पर पेश करने की कोशिश की जा रही है, पर अदालती कार्रवाई ने सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उन्होंने खुलासा किया कि केजरीवाल ने 2018 में ड्रग के झूठे आरोप लगाने के बाद माफी मांगी थी। उसके बाद मैं सत्ता में नहीं आया, पर अब झूठी झाड़ू पार्टी द्वारा फिर मेरे नाम को ड्रग मामले से जोड़कर सियासी फायदा लेने की कोशिश की जा रही है। यह झाड़ू पार्टी का सफेद झूठ है, जिसे पंजाब के लोगों के सामने बेनकाब करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार को आरोप साबित करने के लिए 18 मार्च 2025 तक का समय दिया गया था, पर केजरीवाल और भगवंत मान सरकार मेरे खिलाफ आरोप साबित करने में असफल रही है। मेरे वकील ने अदालत में सारे तथ्य पेश करके दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। मेरे वकील डी.एस. सोबती ने अदालती कार्रवाई का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि मेरा ड्रग मामले से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर कोई संबंध साबित नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि सरकार न तो 736 करोड़ रुपये की ड्रग मनी से मेरा कोई संबंध साबित कर सकी है और न ही गाड़ियों के जरिए किसी को ले जाने या किसी और तरह के संबंधों के बारे में कोई ठोस सबूत पेश कर सकी है। झूठे आरोप साबित करने के लिए चार विशेष जांच टीमें बनाने के बावजूद सरकार कुछ भी साबित नहीं कर सकी। आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी सरकार ठोस सबूतों की बजाय आंकड़ों के सहारे आरोप लगाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने खुलासा किया कि झाड़ू सरकार अदालत में कुछ और और अदालत के बाहर कुछ और बयान दे रही है। सरकार के वकील द्वारा अदालत में पेश किए गए तथ्यों और सरकार के बाहर के प्रचार में फर्क ने इस पूरे मामले पर सवाल खड़े किए हैं। सुप्रीम कोर्ट में अगर मेरे खिलाफ ड्रग तस्करी का कोई सबूत है तो उसे सामने लाने की बात कही गई है। सरकार को चाहिए कि वह सियासी बयानबाजी करने की बजाय अदालत में तथ्यों और सबूतों के साथ अपना पक्ष साबित करे।
उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों को ड्रग केस के नाम पर गुमराह करने की बजाय सरकार को सूबे के असल मुद्दों का जवाब देना चाहिए। पंजाब में हो रही घटनाओं और सरकार के कामकाज पर उठ रहे सवालों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए मेरे खिलाफ बेबुनियाद प्रचार किया जा रहा है। पर सच्चाई को लंबे समय तक छुपाया नहीं जा सकता और झूठे प्रचार के सहारे लोगों को गुमराह करने वाली सरकार को आखिरकार पंजाब के लोगों के सामने जवाबदेह होना पड़ेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी की लीडरशिप को चुनौती दी कि अगर उनके खिलाफ नशा तस्करी के आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। मजीठिया ने दावा किया कि उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले को नशे के केस से जोड़कर पेश करना लोगों को गुमराह करने की कोशिश है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मजीठिया ने आम आदमी पार्टी की लीडरशिप पर तीखे सियासी हमले करते हुए कहा कि सरकार के मंत्रियों और नेताओं द्वारा अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, जबकि पंजाब में नशों के खात्मे के वादे की जवाबदेही से सरकार बच नहीं सकती। उन्होंने कहा कि साढ़े चार साल से सूबे में नशों का मुद्दा गंभीर बना हुआ है और सरकार को बताना चाहिए कि इस समस्या को खत्म करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद घर-घर नशा पहुंचाने वाली झूठी आम आदमी पार्टी दूसरों पर झूठे आरोप लगाकर खुद नहीं बच सकती।

मजीठिया ने दावा किया कि उन्हें ड्रग केस में फंसाने के लिए जांच के दौरान कई अधिकारियों और विशेष जांच टीमों में बदलाव किए गए पर कुछ भी साबित नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सीबीआई के शिकंजे में भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हरचरण सिंह भुल्लर की गवाही वाली SIT समेत चार SIT का गठन सरकार द्वारा किया गया पर झूठ को सच बनाने में फिर भी झूठी सरकार असफल साबित हुई। उन्होंने सवाल किया कि अगर उनके खिलाफ नशा तस्करी के ठोस सबूत हैं तो जांच और अदालती कार्रवाई के रिकॉर्ड में उन्हें स्पष्ट तौर पर सामने लाया जाए।
मजीठिया ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा पहले की गई माफी का हवाला देते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी की लीडरशिप को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने पुराने मामलों के बारे में भी स्पष्टता देनी चाहिए। उन्होंने केजरीवाल की माफी से संबंधित दस्तावेज का हवाला दिया जिसमें उन्होंने अदालत में हाथ जोड़कर अपना माफीनामा दिया था और भविष्य में ऐसी झूठी बयानबाजी करने से बचने का हलफनामा भी अदालत को दिया था। उन्होंने कहा कि अब सियासी फायदा लेने के लिए अरविंद केजरीवाल और उसका टोला सुप्रीम कोर्ट के हुक्मों की तौहीन करके मानहानि कर रहा है।
इस मामले पर मजीठिया के वकील डीएस सोबती ने स्पष्ट किया कि केजरीवाल से संबंधित कार्रवाई को सिर्फ एक आम चिट्ठी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उनके अनुसार यह अदालत में की गई न्यायिक स्वीकारोक्ति और माफी की बिनती से संबंधित मामला था।
मजीठिया के वकील दमनबीर सोबती ने कहा – ड्रग केस और आय से अधिक संपत्ति का मामला अलग-अलग है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मजीठिया के वकील ने अदालती हुक्मों और कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि ड्रग केस और आय से अधिक संपत्ति के मामले को एक ही रूप में पेश करना कानूनी तौर पर सही नहीं है। उन्होंने दावा किया कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में पेश किए गए दस्तावेजों को नशा तस्करी के सबूत के तौर पर पेश करने से पहले उनकी कानूनी स्थिति और अदालती रिकॉर्ड को देखना जरूरी है।
वकील ने कहा कि ड्रग केस में एन.डी.पी.एस. एक्ट की धारा 37 से संबंधित जमानत की सख्त शर्तों को भी ध्यान में रखना पड़ता है। उनके अनुसार, इस मामले में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियां और जारी किए गए हुक्म महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार द्वारा सार्वजनिक तौर पर किए जा रहे कुछ दावों की अदालती रिकॉर्ड से तुलना की जानी चाहिए। वकील ने यह भी कहा कि मामले में पेश किए गए पूरक चालान को लेकर जो बातें प्रचारित की जा रही हैं, उनकी असलियत अदालती दस्तावेजों से ही स्पष्ट हो सकती है। उनके दावे के अनुसार, अदालत में होने वाली कार्रवाई और अदालत के बाहर किए जाने वाले सियासी बयानों में फर्क है सिर्फ कुछ पेज आज जमा करवाए गए है।

करोड़ों रुपये के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल
मजीठिया के वकील ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में दर्शाई गई संपत्ति और वित्तीय लेन-देन के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक तौर पर अलग-अलग रकमों का जिक्र किया जा रहा है, पर उनके अनुसार इन आंकड़ों को संबंधित चालान और अदालती रिकॉर्ड से मिलाकर देखा जाना चाहिए। वकील ने दावा किया कि कुछ कंपनियों और वित्तीय लेन-देन को लेकर किए जा रहे दावों के बावजूद यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संबंधित कंपनियों की मजीठिया के साथ क्या कानूनी साझेदारी थी और किस आधार पर किसी रकम को गैर-कानूनी आय कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ नकदी जमा होने के आधार पर उसे काला धन करार नहीं दिया जा सकता; इसके लिए लेन-देन के स्रोत और अन्य संबंधित सबूतों की जांच लाजमी है।
बेअदबी और संस्कार के मामले पर भी सरकार को घेरा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिक्रम मजीठिया ने एक और वीडियो दिखाते हुए दावा किया कि दलजीत सिंह के मामले में जिस तरीके से मृतक देह को ले जाने और संस्कार करने की कार्रवाई हुई, उस संबंध में भी सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने वीडियो के हवाले से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सिख नौजवानों के साथ धक्केशाही, लाशों के साथ बेहुरमती और अमृतधारी सिखों की बेअदबी की गई। मजीठिया ने कहा कि पंजाब में नशों, कानून-व्यवस्था और अन्य गंभीर मुद्दों पर जवाब देने की बजाय सरकार उनके मामले को बार-बार उछाल रही है। उन्होंने कहा कि सूबे के लोगों को सियासी बयानबाजी की बजाय अपने मूल मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगना चाहिए।
अंत में मजीठिया ने कहा कि वह जांच और कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहे हैं और अगर सरकार के पास कोई नया सबूत है तो उसे कानून के अनुसार पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने आम आदमी पार्टी को चुनौती दी कि वह अदालती रिकॉर्ड के आधार पर अपने दावे साबित करे, नहीं तो अब खुद माफी मांगे या फिर अदालती कार्रवाई का सामना करने के लिए भी तैयार रहे।
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