‘एक प्रदर्शनकारी के साथ आतंकवादी जैसा व्यवहार करने की हिम्मत कैसे हुई’: सुखबीर सिंह बादल

कहा कि अमृतधारी सिख मोहनजीत सिंह को प्रताड़ित करने और धार्मिक रूप से उत्पीड़न करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए : अकाली दल अध्यक्ष
‘पंजाब एक पुलिस राज्य नही हैः सरदार सुखबीर सिंह बादल ने डीजीपी और डीआईजी से बात कर मामले की समयबद्ध स्वतंत्र जांच की मांग की

सरदार सुखबीर सिंह बादल ने अस्पताल में पीड़ित मोहनजीत सिंह से मुलाकात कर पुलिस की बर्बरता की कड़ी निंदा की

न्यूज़म ब्यूरो 
संगरूर/चंडीगढ़, 4सितंबर। शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज मांग की है कि 2 सितंबर को सुनाम हलके के शेरों गांव में मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले सिख नौजवान और नशा विरोधी कार्यकर्ता मोहनजीत सिंह शेरों को प्रताड़ित करने और धार्मिक रूप से उत्पीड़ित करने वाले सभी पुलिस अधिकारियों को तत्काल आपराधिक मामला दर्ज करने और उन्हें बर्खास्त करने की मांग की है।
अकाली दल अध्यक्ष ने यहां सिविल अस्पताल में मोहनजीत से मुलाकात कर कहा कि उन्हें यह जानकर गहरा सदमा लगा कि नशा विरोधी कार्यकर्ता को बिजली के झटके दिए गए और उनकी जांघों पर चाकू से कट लगाए गए और उन पर नमक रगड़ा गया और उन्हें चप्पलों से बुरी तरह पीटा गया। उन्होने कहा कि डीएसपी हरविंदर सिंह खैरा और एसएचओ प्रतीक जिंदल समेत पुलिस अधिकारियों ने मोहनजीत की दाढ़ी के बाल तक खींचे और धार्मिक चिन्हों का अपमान किया और सिख नौजवान का ‘कछेरा’ तक फाड़ा, जो असहनीय है। उन्होने कहा,‘‘ अकाली दल मांग करता है कि इन दोनों अधिकारियों के साथ-साथ सबके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए जिन्होने मोहनजीत को प्रताड़ित किया और उनके धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया , उन्हें तुरंत प्रभाव से बर्खास्त किया जाना चाहिए।

यह दावा करते हुए कि गुरु दोखी मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब को पुलिस राज्य में बदल दिया है। उन्होने कहा कि शेरों गांव में मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन करते हुए मोहनजीत ने सिर्फ एक काला कप़ड़ा लहराया था। ‘‘ इस पर पुलिस ने उन्हे निशाना बनाया और मोहनजीत ने मुझे बताया कि पुलिस अधिकारियों ने उनके बाल खींचे और अब वह कान से सुन नही सकते और इस अमानवीय पिटाई से उनकी आंखों से दिखना भी कम हो गया है।’’

सरदार बादल ने उसी समय डीजीपी गौरव यादव और डीआईजी कुलदीप चहल को फोन किया और डीएसपी हरविंदर सिंह खैरा के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा, जिन्हे उन्होने आम आदमी पार्टी के  राज्य प्रधान अमन अरोड़ा का ‘कमाउ पुत’ बताया। उन्होने कहा‘‘ अगर इन पुलिस कर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की जाती है तो अगले साल पार्टी की सरकार बनने के बाद हम उन्हें सेवा से बर्खास्त कर देंगें।’’

अकाली दल अध्यक्ष ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को पत्र लिखकर मोहनजीत सिंह की अवैध गिरफ्तारी, यातना और धार्मिक उत्पीड़न की समयबद्ध स्वतंत्र जांच की मांग की। सरदार बादल ने एनएचआरसी से अपने जांच प्रभाग के माध्यम से जांच करने यां राज्य के बाहर के किसी अधिकारी को इसे सौंपने का आग्रह किया। उन्होने आयोग से पंजाब डाॅयरेक्टर जनरल आॅफ पुलिस से इस मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगने के अलावा उन सभी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुकरणीय कार्रवाई की मांग करने को कहा, जिन्होने नशा विरोधी कार्यकर्ता के जीवन और स्वतंत्रता को खतरे में डाल दिया।

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अकाली  दल अध्यक्ष ने एनएचआसी से जांच लंबित रहने तक मुख्यमंत्री के सार्वजनिक समारोह वाली जगह के साथ-साथ परिवहन वाहनों , पुलिस स्टेशनों और चिकित्सा केंद्रों से प्राप्त सभी सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने के लिए निर्देश जारी करने का आग्रह किया। इस अवसर पर अकाली दल अध्यक्ष के साथ अरविंद खन्ना और विनरजीत सिंह गोल्डी सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।

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