शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को ‘भारतरत्न’ देने की मांग की थी, पर भाजपा सरकार ने न मानी : मान

अगर शहीद-ए-आज़म भगत सिंह भारत के पहले प्रधानमंत्री होते तो देश के हालात आज कुछ और होते : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान 

अगर आज़ादी के बाद देश की बागडोर नौजवानों को सौंप दी जाती तो भारत आज दुनिया में अग्रणी देश होता : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान 

जिन्होंने आज़ादी के संग्राम में कुछ नहीं खोया, वे आज दावा कर रहे हैं कि भारत 2014 में ही आज़ाद हुआ और देश अब उनके आदेशों के अनुसार चले : मान 

इन्होंने अपने नेताओं के नाम पर भव्य स्मारक बनाए, लेकिन शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के लिए कुछ नहीं किया : भगवंत सिंह मान 

हमने मोहाली हवाई अड्डे का नाम शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखने के लिए केंद्र सरकार से लंबी लड़ाई लड़ी : मुख्यमंत्री 

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न्यूज़म ब्यूरो

हुसैनीवाला (फिरोजपुर), 23 मार्च : फिरोजपुर के हुसैनीवाला में शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस के अवसर पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शहीदों के सम्मान में उनके सपनों का ‘रंगला पंजाब’ बनाने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए यहां ऐतिहासिक राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर शहीदों के परिवारों को सम्मानित किया गया और 24.99 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले हुसैनीवाला विरासत परिसर का शिलान्यास किया गया। 

देश के महान क्रांतिकारियों की गौरवशाली विरासत को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह अवसर केवल उन वीरों के बलिदान को याद करने का ही नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और अन्याय के खिलाफ खड़े होने के दृढ़ संकल्प को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का भी है। उन्होंने शहीदों की महान सोच के अनुरूप पंजाब और देश की सेवा करने के अपने संकल्प को दोहराया और साथ ही इन महान स्वतंत्रता सेनानियों को अब तक भारत रत्न (सर्वोच्च सम्मान) न दिए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आज़ादी के शुरुआती वर्षों में यदि देश की बागडोर ऐसे साहसी युवाओं के हाथों में होती तो भारत की तस्वीर कुछ और ही होती।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “इस देश के लालची और स्वार्थी नेताओं ने जीवित रहते हुए अपने नाम पर स्टेडियम बनवा लिए, लेकिन शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव जैसे सच्चे शहीदों को सम्मानित करने के लिए आज तक कोई आगे नहीं आया।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “इन महान क्रांतिकारियों ने कम उम्र में अपनी जान कुर्बान कर दी, लेकिन आज़ादी के बाद सत्ता के लालचियों ने कुर्सी पर कब्जा कर लिया और खून बहाकर हासिल की गई आज़ादी का श्रेय खुद ले लिया, जिसके लिए उन्होंने कभी संघर्ष भी नहीं किया।”

उन्होंने कहा, “शहीद राजगुरु, शहीद सुखदेव और शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को याद करने के लिए केवल फूल ही रह गए, जबकि अन्य लोग आज़ादी की विरासत का झूठा दावा कर प्रमुख बन गए।” मुख्यमंत्री ने कहा, “उन महान योद्धाओं को चुप कराने के लिए ही उन्हें जल्द फांसी दी गई थी, क्योंकि लोग उनके निडर विचारों के पीछे इकट्ठा होने लगे थे।”

महंगी कीमत पर मिली आज़ादी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि हमारी आज़ादी कितनी महंगी थी—विभाजन के दौरान लगभग 10 लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई और लाखों लोग विस्थापित हुए।” उन्होंने आगे कहा, “हमारे बुजुर्गों ने बहुत बलिदान दिए, लेकिन सत्ताधारी इस पीड़ा को समझने में असफल रहे हैं, क्योंकि उन्हें शहीदों की कुर्बानियों से बना तैयार देश विरासत में मिला।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “कुछ कृतघ्न नेता अब यह दावा कर रहे हैं कि भारत को वास्तविक आज़ादी केवल 2014 में मिली, जो हमारे शहीदों का घोर अपमान है।” उन्होंने कहा, “यह हैरान करने वाली बात है कि कुछ लोग शहीद भगत सिंह को केवल एक ‘समाज सेवक’ के रूप में प्रस्तुत करते हैं, उन्हें शहीद नहीं मानते। ऐसे प्रमाण पत्र देने वाले ये लोग कौन हैं?”

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लोगों से शहीदों से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “आज का दिन इन महान नायकों को याद करने, उनकी प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने और सुनने का है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।”

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राजनीतिक प्राथमिकताएं लंबे समय से गलत रही हैं। उन्होंने कहा, “राजनीतिक नेताओं ने अपने खुद के बुत लगवाए और जीवित रहते हुए अपने नाम पर स्टेडियम बनवाए, लेकिन शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव जैसे महान शहीदों का सम्मान करने के बारे में किसी ने नहीं सोचा।”

उन्होंने आगे कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमें मोहाली हवाई अड्डे का नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर रखने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा, क्योंकि केंद्र सरकार ने बार-बार हमारी मांगों को नजरअंदाज किया, लेकिन अंततः हमारी लगातार कोशिशों से हम इसे उनके सम्मान में नामित करने में सफल रहे।

उन्होंने आगे कहा कि हलवारा हवाई अड्डे का नाम शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर रखा जा रहा है, जिन्हें शहीद भगत सिंह अपना गुरु मानते थे।

उन्होंने कहा कि यदि शहीद-ए-आज़म भगत सिंह 1952 के पहले आम चुनावों के बाद प्रधानमंत्री बन जाते, तो आज देश की तस्वीर पूरी तरह अलग होती। आज नेपाल में 35 वर्षीय युवा प्रधानमंत्री बन गया है। यदि यहां भी युवाओं को नेतृत्व सौंपा जाता, तो भारत विश्व में अग्रणी राष्ट्र बनता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों की याद केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग भगत सिंह को केवल उनके जन्म या शहादत दिवस पर याद करते हैं, जबकि वे केवल एक परिवार के नहीं, बल्कि पूरे देश के हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम उनके आदर्शों पर चलें, तो पंजाब को फिर से समृद्ध बनने से कोई नहीं रोक सकता।

उन्होंने कहा कि हमारा इतिहास बलिदानों से भरा हुआ है और हमारे महान गुरुओं ने हमेशा हमें अन्याय और अत्याचार के खिलाफ खड़े होना सिखाया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम इन बलिदानों को भूलते जा रहे हैं। हम परीक्षाओं के लिए तथ्य तो याद रखते हैं, लेकिन उनके विचारों को समझने में असफल रहते हैं।

इस महान शहीद के जीवन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भगत सिंह ने अपने व्यक्तिगत जीवन से ऊपर क्रांति का मार्ग चुना और अपनी सगाई के दिन भी घर छोड़ दिया।

उन्होंने कहा कि उन्हें दुख होता है जब लोग वाहनों पर उनकी तस्वीर लगाकर कहते हैं कि वे वापस आएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लौटने का इंतजार करने के बजाय हमें उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए और देश की सेवा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज के समय में बम और हथियारों की जरूरत नहीं है, बल्कि वोट की ताकत सबसे बड़ी शक्ति है और सही नेताओं का चुनाव करके लोग वास्तविक बदलाव ला सकते हैं।

लोगों से संकल्प लेने की अपील करते हुए उन्होंने कहा, “आइए हम शहीदों के मार्ग पर चलने और अपने हाथों से अपने पंजाब का निर्माण करने का संकल्प लें।” उन्होंने कहा कि हुसैनीवाला की यह पवित्र भूमि, जहां भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का अंतिम संस्कार अंग्रेजों द्वारा किया गया था, पीढ़ियों को निःस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इस पवित्र स्थल पर आकर देश की आज़ादी के लिए 23 वर्ष की आयु में बलिदान देने वाले शहीद को श्रद्धांजलि देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के सपनों को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी और देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा।

उन्होंने कहा कि इन शहीदों के बलिदान ने अनगिनत युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया और आगे भी लाखों लोगों को निःस्वार्थ देश सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने युवाओं से एक प्रगतिशील और समृद्ध भारत के निर्माण के लिए उनके मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने हुसैनीवाला विरासत परिसर का शिलान्यास करते हुए कहा कि 24.99 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट हमारे महान शहीदों को श्रद्धांजलि देने और आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी विरासत को संरक्षित करने का एक विनम्र प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य हुसैनीवाला में विरासत क्षेत्र का विकास करने के साथ-साथ पंजाब में पर्यटन को बढ़ावा देना भी है।

इस परियोजना का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस परिसर में एक भव्य प्रवेश द्वार, शहीदों के जीवन को समर्पित गैलरी, भित्ति चित्र, पार्कों और स्मारक स्थलों का सौंदर्यीकरण और लैंडस्केपिंग शामिल होगी। इसके अलावा ऐतिहासिक घटनाओं से संबंधित थीम आधारित चित्र, पुराने पुल पर 3-डी मैपिंग शो, एक म्यूजिकल फाउंटेन, बच्चों के लिए खेल क्षेत्र, वरिष्ठ नागरिकों के लिए आराम स्थल, ऑन-ग्रिड सोलर पावर प्लांट और स्वच्छ पेयजल के लिए आरओ प्लांट भी स्थापित किया जाएगा।

 

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