Groundwater Crisis : पंजाब के 95 ब्लॉकों में सुधार

Groundwater Crisis: Improvement in 95 Blocks of Punjab Groundwater Crisis: Improvement in 95 Blocks of Punjab

Groundwater Crisis को लेकर पंजाब में नए आंकड़े सामने आए हैं। 153 में से 95 भूजल ब्लॉकों में सुधार दर्ज हुआ है

चार क्षेत्र सुरक्षित श्रेणी में पहुंचे हैं। सरकार ने नहरी पानी के बढ़ते उपयोग और भूजल पर निर्भरता घटने को सुधार की प्रमुख वजह बताया है

न्यूज़म ब्यूरो

पंजाब, 31 अगस्त | पंजाब में लगातार गिरते भूजल स्तर को लेकर नए आंकड़ों में सुधार के संकेत सामने आए हैं। आम आदमी पार्टी ने केंद्रीय भूजल बोर्ड के ताजा आकलन का हवाला देते हुए यह दावा किया।

पार्टी के राज्य मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने कहा कि पंजाब में भूजल दोहन की दर लगातार कम हुई है।

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उन्होंने इस बदलाव का श्रेय नहरी पानी के बढ़ते उपयोग को दिया।

Groundwater Crisis- Baltej Pannu
Groundwater Crisis- Baltej Pannu

Groundwater Crisis में दोहन की दर घटी

बलतेज पन्नू के अनुसार, वर्ष 2021-22 में पंजाब में भूजल दोहन की दर 163.80 प्रतिशत थी।

वर्ष 2025 में यह दर घटकर 156.36 प्रतिशत दर्ज की गई।

वर्ष 2025-26 में भूजल दोहन की दर और घटकर 152.22 प्रतिशत पहुंच गई।

चार वर्षों के दौरान इसमें 11.58 प्रतिशत अंकों का सुधार बताया गया है।

सालाना भूजल दोहन भी लगभग 28.01 अरब घन मीटर से घटकर 26.32 अरब घन मीटर रहा।

95 ब्लॉकों में दर्ज हुआ सुधार

ताजा आकलन के अनुसार, पंजाब के 153 भूजल आकलन ब्लॉकों में से 95 में सुधार दर्ज हुआ है।

गंभीर श्रेणी वाले ब्लॉकों की संख्या 10 से घटकर छह बताई गई है।

चार ब्लॉक अब सुरक्षित श्रेणी में पहुंच गए हैं।

इनमें फाजिल्का का अरनीवाला, फिरोजपुर का मक्खू और होशियारपुर का हाजीपुर शामिल हैं।

पठानकोट का नरोट जैमल सिंह ब्लॉक भी सुरक्षित श्रेणी में पहुंचने वाले क्षेत्रों में शामिल है।

पन्नू ने 14 अन्य ब्लॉकों में भी उल्लेखनीय सुधार का दावा किया।

Canal Water के बढ़ते उपयोग का दावा

पंजाब में नहरी पानी के उपयोग में बड़ा बदलाव होने का दावा किया गया है।

पन्नू के अनुसार, वर्ष 2022 में नहरी पानी का उपयोग करीब 21 प्रतिशत था।

अब यह बढ़कर लगभग 80 से 82 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

सरकार ने 14,100 नहरों को चालू करने का दावा किया है।

इसके अलावा 400 किलोमीटर से अधिक बंद नहरों को बहाल किया गया है।

एक हजार किलोमीटर से अधिक नहरों को पक्का करने का भी दावा किया गया।

खेती में भूजल पर निर्भरता कम करने की कोशिश

पंजाब में निकाले जा रहे भूजल का बड़ा हिस्सा खेती के लिए उपयोग होता है।

कुल 26.32 अरब घन मीटर भूजल में लगभग 24.95 अरब घन मीटर कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होता है।

नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों की भूजल पर निर्भरता कम होने की उम्मीद जताई गई है।

सरकार का दावा है कि नहरों का बेहतर नेटवर्क खेतों तक पानी पहुंचाने में मदद कर रहा है।

विपक्ष पर भी साधा निशाना

बलतेज पन्नू ने कहा कि पंजाब का भूजल संकट अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

हालांकि, उन्होंने ताजा आंकड़ों को सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत बताया।

उन्होंने अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस की पिछली सरकारों पर भी सवाल उठाए।

पन्नू ने कहा कि वर्तमान सरकार ने नहरी ढांचे और जल प्रबंधन पर काम किया है।

पंजाब के भूजल संसाधनों को बचाना आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।

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