पंजाब के पठानकोट जिले की बेटी अंशिका भारद्वाज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है
जॉर्डन की राजधानी अम्मान में आयोजित Asian Karate Championship में उन्होंने रजत पदक जीता
न्यूज़म ब्यूरो
पठानकोट, 14 सितंबर | Asian Karate Championship में पंजाब के पठानकोट जिले की अंशिका भारद्वाज ने भारत के लिए रजत पदक जीता। जॉर्डन की राजधानी अम्मान में 8 से 11 सितंबर तक आयोजित 24वीं एशियाई कराटे चैंपियनशिप में अंशिका ने अंडर-21 महिला 68 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लिया। उन्होंने ईरान, जॉर्डन और सऊदी अरब की खिलाड़ियों के खिलाफ मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में सऊदी अरब की खिलाड़ी से हार के बाद उन्हें रजत पदक मिला। यह उपलब्धि उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की अब तक की बड़ी सफलताओं में शामिल है। अंशिका के पिता भारतीय सेना में सेवारत हैं और उनकी माता शिक्षिका हैं। उन्होंने सैन्य अनुशासन वाले माहौल में रहते हुए खेल को अपना लक्ष्य बनाया। 22 सितंबर 2025 को वह केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में शामिल हुईं। वर्तमान में उनकी तैनाती छठी बटालियन, गोवा में है। इससे पहले वह नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में पांचवीं केआईओ सीनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। अंशिका की अंतरराष्ट्रीय सफलता से पठानकोट और खेल जगत में खुशी का माहौल है। उनकी उपलब्धि मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास की मिसाल बनकर सामने आई है।
Asian Karate Championship : फाइनल तक पहुंचने का शानदार सफर
अंशिका ने प्रतियोगिता में लगातार मजबूत प्रदर्शन किया।
उन्होंने अलग-अलग मुकाबलों में अपनी तकनीकी क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन किया।
महत्वपूर्ण मुकाबलों में उन्होंने दबाव के बावजूद धैर्य बनाए रखा।
इसी प्रदर्शन के दम पर वह फाइनल तक पहुंचने में सफल रहीं।
फाइनल मुकाबला उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
सऊदी अरब की खिलाड़ी के खिलाफ कड़े मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
इसके बावजूद रजत पदक उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की बड़ी उपलब्धि बन गया।
यह उपलब्धि अंशिका की मेहनत और निरंतर अभ्यास का परिणाम मानी जा रही है।
उनकी सफलता से पठानकोट और पूरे पंजाब में खुशी का माहौल है।
Asian Karate Championship : फौजी पिता से मिला अनुशासन
अंशिका भारद्वाज के पिता भारतीय सेना में सेवारत हैं।
उनकी माता एक शिक्षिका हैं और परिवार में शिक्षा को विशेष महत्व मिला।
अंशिका ने बचपन से ही घर में सैन्य अनुशासन को करीब से देखा।
इसी माहौल ने उनके व्यक्तित्व और खेल जीवन को प्रभावित किया।
उन्होंने 12वीं की पढ़ाई के साथ कराटे को अपना लक्ष्य बनाया।
अंशिका ने दसवीं की पढ़ाई सुजानपुर के बीएसएमएसडी राजपूत पब्लिक स्कूल से की।
उन्होंने 12वीं की पढ़ाई महाराणा प्रताप सीनियर सेकेंडरी स्कूल, भनवाल से पूरी की।
पढ़ाई के साथ उन्होंने खेल प्रशिक्षण पर भी लगातार ध्यान दिया।
उनकी मेहनत ने आगे चलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिणाम दिया।
CISF : अब देश सेवा के साथ खेल में भी पहचान
अंशिका 22 सितंबर 2025 को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में भर्ती हुईं।
वर्तमान में वह सीआईएसएफ की छठी बटालियन, गोवा में तैनात हैं।
नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने कराटे का अभ्यास भी जारी रखा।
सीआईएसएफ जैसी जिम्मेदार सेवा के साथ खेल करियर जारी रखना आसान नहीं है।
इसके बावजूद अंशिका ने दोनों क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखा।
उनकी उपलब्धि उनके समर्पण और अनुशासन को दर्शाती है।
Karate Silver Medal : राष्ट्रीय स्तर पर भी जीता पदक
अंतरराष्ट्रीय सफलता से पहले अंशिका ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी शानदार प्रदर्शन किया था।
नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में पांचवीं केआईओ सीनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप हुई थी।
उन्होंने इस प्रतियोगिता के 61 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक जीता।
देश के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच कांस्य पदक जीतना भी बड़ी उपलब्धि रही।
इस प्रदर्शन ने अंशिका के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का रास्ता मजबूत किया।
राष्ट्रीय मंच पर मिले अनुभव का फायदा उन्हें जॉर्डन में भी मिला।
उन्होंने आत्मविश्वास के साथ एशियाई स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
Asian Karate Championship : पठानकोट में खुशी की लहर
अंशिका की सफलता के बाद पठानकोट में खुशी का माहौल है।
सीआईएसएफ बल और खेल प्रेमियों ने उनकी उपलब्धि पर प्रसन्नता जताई है।
स्थानीय लोगों के लिए यह सफलता गर्व का विषय बन गई है।
अंशिका ने साबित किया कि अनुशासन और मेहनत से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
उनकी उपलब्धि क्षेत्र की दूसरी युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।
उन्होंने खेल और सेवा दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
अंतरराष्ट्रीय पदक से बढ़ी अगली चुनौती की उम्मीद
जॉर्डन से मिला रजत पदक अंशिका के करियर में नया अध्याय है।
अब उनसे आने वाली प्रतियोगिताओं में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
राष्ट्रीय पदक के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है।
अंशिका की कहानी युवाओं के लिए मेहनत और अनुशासन का संदेश देती है।
उन्होंने दिखाया कि सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर प्रयास परिणाम ला सकते हैं।
उनका लक्ष्य अब आने वाली प्रतियोगिताओं में देश के लिए और पदक जीतना रहेगा।
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