पाकिस्तान में हिंदू श्रद्धालुओं को गुरुद्वारा दर्शन के लिए न जाने देना भारत में लोगों में फूट डालने का घृणित प्रयास : चावला

अमृतसर। पंजाब सरकार की पूर्व मंत्री एवं भाजपा की वरिष्ठ नेत्री लक्ष्मी कांता चावला ने कहा है कि हिंदू व सिख जो एक ही मां के दो बेटे हैं, एक ही परंपरा से पैदा हुए हैं और जिनका परिवार भी एक है उनको बांटने के लिए पहले अंग्रेजों ने प्रयास किया। 1882 में पहले अंग्रेजों का थोपा हुआ प्रिंसिपल मैकालिफ इस काम को आगे बढ़ाता रहा और इसके बाद अपने ही देश के कुछ नेताओं ने समाज को बांटने की कमान संभाल ली।
भारत सरकार शीघ्र ही गंभीर नोटिस ले

अमृतसर। पंजाब सरकार की पूर्व मंत्री एवं भाजपा की वरिष्ठ नेत्री लक्ष्मी कांता चावला ने कहा है कि हिंदू व सिख जो एक ही मां के दो बेटे हैं, एक ही परंपरा से पैदा हुए हैं और जिनका परिवार भी एक है उनको बांटने के लिए पहले अंग्रेजों ने प्रयास किया। 1882 में पहले अंग्रेजों का थोपा हुआ प्रिंसिपल मैकालिफ इस काम को आगे बढ़ाता रहा और इसके बाद अपने ही देश के कुछ नेताओं ने समाज को बांटने की कमान संभाल ली।

चावला ने कहा कि हिंदुस्तान के सभी प्रमुख गुरुद्वारों में विशेषकर अमृतसर श्री हरिमंदिर में अगर रोज के श्रद्धालुओं की संख्या देखी जाए तो हिंदू श्रद्धालु ज्यादा हैं, जो देश से भी आते हैं, विदेश से भी आते हैं। पूरा देश श्री हरिमंदिर के दर्शन करने आता है और सभी सिख बंधु हिंदुस्तान के सभी बड़े मंदिरों में श्रद्धा से माथा टेकते हैं। वैसे तो हिंदू और सिख दो लिखने में ही कष्ट होता है, पर अगर राजनीतिक हितों ने उन्हें दो पक्ष बना ही दिया है तो पाकिस्तान को यह छूट नहीं दी जा सकती कि वह भारत से गए हिंदू श्रद्धालुओं को गुरु घर के दर्शन करने न जाने दे। जत्थेदार श्री गड़गज भी पाकिस्तान पहुंचे हैं। यह उनसे आशा की जाती है कि वे इस अन्याय  को रोकते और पाकिस्तान की चाल का मुंह तोड़ जवाब देते। अफसोस ऐसा नहीं हो सका। अब भारत सरकार की ड्यूटी है कि वे पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दे और पाक के केवल हिंदू श्रद्धालुओं को ही भारत यात्रा की आज्ञा दे।
देश में सभी धार्मिक संस्थाओं और राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को इसके विरोध में आवाज उठानी चाहिए, जो अभी तक कहीं से नहीं आई।

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